सुबह की मीठी गूंज,।

सुबह की मीठी गूंज,।

आंखे खुलने ही वाली थी,
पहले कान को पता चला, सुबह हो गई थी।
पंछियों की मीठी गूंज से,
मै खिल खिल हो उठी थी।
नाक ने सिलवट ली थी,
फूलों की महक जैसे उसे बुला रही थी।
आंखे जब खुली,खिड़की खुली हुई थी,
सूरज की किरणे जैसे मुस्कुरा रही थी।
अंगड़ाइयां लेकर खड़ी हुई थी,
हवाएं जैसे नहेला रही थी।

पांव जमीन पर रखते ही,

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