Nanjani | दर्पण और इन्सान

दर्पण और इन्सान

दर्पण के सामने खड़ा हो उठा मै, आज तो उसे पूछ ही बैठा मै; क्या जो दिख रहा हूं वही हूं मै? आज तो बता ही दे कौन हूं मै.., खुद ही जानले कौन है तू, मै सीरत नहीं,सूरत ही हूं; आज खुद को अंदर से जांखले तू, खुद ही से खुद को पहचान ले […]

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